रुड़की के नए इलाक़ों में टैक्स की तैयारी, मगर बुनियादी सहूलियतें अब भी नदारद


रुड़की के नए इलाक़ों में टैक्स की तैयारी, मगर बुनियादी सहूलियतें अब भी नदारद; मोहनपुरा-मौहम्मदपुर समेत कई क्षेत्रों में लोगों में बढ़ी नाराज़गी।

रिपोर्ट- मौ. गुलबहार गौरी

रुड़की। 20 जुलाई 2026 – रुड़की नगर निगम की जानिब से 15 जुलाई 2026 को नए शामिल इलाक़ों के तमाम व्यवसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी कर उनके भवनों का रकबा, इस्तेमाल और दूसरी ज़रूरी मालूमात तलब की गई हैं। माना जा रहा है कि यह कार्रवाई व्यवसायिक संपत्तियों पर हाउस टैक्स तय करने की प्रक्रिया का अहम हिस्सा है। मगर इस क़दम के साथ ही मोहनपुरा-मौहम्मदपुर, आसफ़नगर, शेरपुर और दूसरे नए शामिल इलाक़ों के कारोबारियों व स्थानीय बाशिंदों में नाराज़गी खुलकर सामने आने लगी है।

स्थानीय लोगों का कहना है कि इन इलाक़ों को नगर निगम की हद में शामिल हुए सात-आठ साल गुज़र चुके हैं, लेकिन आज भी शहर जैसी बुनियादी सहूलियतें मुकम्मल तौर पर मयस्सर नहीं हो सकी हैं। बरसात शुरू होते ही जलभराव की पुरानी समस्या फिर सिर उठा लेती है। जगह-जगह पानी भर जाता है, नालियों की मुकम्मल व्यवस्था नहीं है, जल निकासी का इंतज़ाम नाकाफ़ी है, कई सड़कों की हालत ख़स्ता है, सफ़ाई व्यवस्था उम्मीद के मुताबिक़ नहीं है और स्ट्रीट लाइट जैसी बुनियादी सहूलियतें भी कई इलाक़ों में अधूरी पड़ी हैं।

बाशिंदों का कहना है कि नगर निगम में शामिल होने से पहले तत्कालीन स्थानीय विधायक प्रणव सिंह, ज़िला पंचायत और ग्राम प्रधानों ने अपने संसाधनों के मुताबिक़ कई विकास कार्य कराए थे। लोगों का दावा है कि नगर निगम में शामिल होने के बाद जिस रफ़्तार और पैमाने पर विकास होना चाहिए था, वैसा ज़मीनी स्तर पर नज़र नहीं आया। यही वजह है कि जलभराव और दूसरी नागरिक परेशानियाँ आज भी पहले की तरह बरक़रार हैं।

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जब तक नए इलाक़ों को नगर निगम के मानकों के मुताबिक़ सड़क, जल निकासी, नालियाँ, सफ़ाई, स्ट्रीट लाइट और दूसरी बुनियादी सहूलियतें पूरी तरह फ़राहम नहीं कराई जातीं, तब तक व्यवसायिक भवनों पर टैक्स लगाने का फ़ैसला इंसाफ़ के तक़ाज़ों के मुताबिक़ नहीं माना जा सकता। उनका कहना है कि टैक्स वसूलना सरकार का हक़ है, लेकिन बेहतर नागरिक सुविधाएँ देना भी सरकार और नगर निगम की बराबर की ज़िम्मेदारी है।

इलाक़े के लोगों का इल्ज़ाम है कि इस पूरे मामले में डबल इंजन सरकार, रुड़की नगर निगम और संबंधित स्थानीय जनप्रतिनिधियों की सामूहिक ज़िम्मेदारी बनती थी कि नए शामिल क्षेत्रों का मुकम्मल विकास यक़ीनी बनाया जाता। लोगों का कहना है कि अगर इतने वर्षों बाद भी जलभराव जैसी बुनियादी समस्या का स्थायी हल नहीं निकल पाया तो टैक्स वसूली शुरू करने से पहले विकास कार्यों का हिसाब जनता के सामने रखा जाना चाहिए।

मोहनपुरा-मौहम्मदपुर, आसफ़नगर और शेरपुर के कुछ बाशिंदों का आरोप है कि उनके स्थानीय विधायक सरकार से इस मसले पर असरदार जवाब तलब करने के बजाय सिर्फ़ चुनावी वादों तक महदूद रहे। वहीं कई लोगों का कहना है कि सत्ता पक्ष के जनप्रतिनिधि सरकार के फ़ैसलों का समर्थन करें या न करें, लेकिन विपक्षी और निर्दलीय विधायकों की यह ज़िम्मेदारी बनती है कि वे जनता की आवाज़ सरकार तक पहुँचाएँ और तब तक व्यवसायिक भवनों पर टैक्स वसूली रोकने की मांग करें, जब तक इन इलाक़ों में शहर जैसी तमाम बुनियादी सहूलियतें मुकम्मल तौर पर उपलब्ध न हो जाएँ।

गौरतलब है कि 21 अक्तूबर 2019 को तत्कालीन मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने रुड़की की एक जनसभा में नए शामिल क्षेत्रों को 10 वर्ष तक हाउस टैक्स में राहत देने की घोषणा की थी। इसके बाद 4 नवंबर 2020 को राज्य मंत्रिमंडल ने आवासीय भवनों को 10 वर्ष तक हाउस टैक्स से छूट देने के प्रस्ताव को मंज़ूरी दी। बाद में 31 दिसंबर 2021 को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट ने व्यवसायिक भवनों को भी 10 वर्ष तक कर छूट देने का फ़ैसला किया। हालांकि 24 अगस्त 2022 को नगर निकायों की माली हालत का हवाला देते हुए इस फ़ैसले पर दोबारा ग़ौर किया गया और जनवरी 2023 में व्यवसायिक भवनों को दी गई 10 वर्ष की कर छूट वापस लेने का निर्णय लागू कर दिया गया।

अब जबकि नगर निगम व्यवसायिक प्रतिष्ठानों का ब्यौरा जमा कर रहा है, नए शामिल इलाक़ों में यह बहस तेज़ हो गई है कि क्या बुनियादी विकास कार्यों को मुकम्मल किए बग़ैर टैक्स वसूली शुरू करना मुनासिब होगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार पहले जल निकासी, सड़क, सफ़ाई, स्ट्रीट लाइट और दूसरी बुनियादी सहूलियतों को शहर के स्तर तक पहुँचाए, उसके बाद ही कर प्रणाली को लागू किया जाए। फ़िलहाल इस पूरे मसले पर मोहनपुरा-मौहम्मदपुर, आसफ़नगर, शेरपुर और दूसरे नए इलाक़ों में चर्चा गर्म है और लोगों की निगाहें अब सरकार, नगर निगम प्रशासन तथा जनप्रतिनिधियों पर टिकी हैं कि वे इन जायज़ सवालों का क्या जवाब देते हैं।


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