हरिद्वार में छात्रवृत्ति घोटाले का बड़ा ख़ुलासा 19 शिक्षण संस्थानों पर मुकदमा दर्ज


हरिद्वार में छात्रवृत्ति घोटाले का बड़ा खुलासा, 19 शिक्षण संस्थानों पर मुकदमा दर्ज, एसआईटी करेगी गहराई से जांच

हरिद्वार में छात्रवृत्ति घोटाले पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई, जांच में दोषी पाए जाने पर होगी सख्त कानूनी कार्रवाई ।

“ रिपोर्ट- मौ.गुलबहार गौरी ”

हरिद्वार।14 जुलाई 2026 । उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद में अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति योजना से जुड़े कथित घोटाले ने तालीमी और प्रशासनिक हलकों में हलचल मचा दी है। शैक्षणिक वर्ष 2021-22 और 2022-23 की छात्रवृत्ति योजना में कथित वित्तीय अनियमितताओं और सरकारी धन के दुरुपयोग के आरोपों के बाद पुलिस ने 19 स्कूलों, कॉलेजों और शिक्षण संस्थानों के खिलाफ सिडकुल थाने में मुकदमा दर्ज किया है। इसे हरिद्वार में अब तक की सबसे बड़ी छात्रवृत्ति जांचों में से एक माना जा रहा है।

मामले में इल्जाम है कि कुछ संस्थानों ने सुनियोजित तरीके से फर्जी दस्तावेज, भ्रामक जानकारियां और संदिग्ध छात्रवृत्ति आवेदन तैयार कर राष्ट्रीय छात्रवृत्ति योजना के तहत सरकारी रकम हासिल की। शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आशंका जताई गई है कि करोड़ों रुपये की छात्रवृत्ति राशि का कथित तौर पर दुरुपयोग किया गया। हालांकि इन आरोपों की हकीकत का फैसला अब एसआईटी की तफ्तीश के बाद ही हो सकेगा।

जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी इप्सिता रावत के मुताबिक, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (NSP) पर कई संदिग्ध आवेदन और रिकॉर्ड सामने आने के बाद भारत सरकार के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने 21 मार्च 2025 को विस्तृत जांच के निर्देश दिए थे। इसके बाद उत्तराखंड शासन के आदेश पर उप जिलाधिकारी स्तर की विशेष जांच समितियों का गठन किया गया। जांच रिपोर्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं और जालसाजी के संकेत मिलने पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी की तहरीर के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर लिया।

 

   ( SSP हरिद्वार- नवनीत सिंह भुल्लर)

  मामले की संगीनियत को देखते हुए एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने सीओ सदर और एसपी बलूनी के नेतृत्व में विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने के निर्देश दिए हैं। यह टीम छात्रवृत्ति आवेदनों, लाभार्थियों के बैंक खातों, प्रवेश अभिलेखों, उपस्थिति रजिस्टर, शैक्षणिक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों की बारीकी से जांच करेगी। एसएसपी का कहना है कि जांच के दौरान जो भी तथ्य और साक्ष्य सामने आएंगे, उनके आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

इस पूरे मामले ने सियासी हलकों में भी चर्चाओं का बाज़ार गर्म कर दिया है। सूत्रों के मुताबिक एफआईआर में नामजद संस्थानों में दो ऐसे कॉलेज भी शामिल बताए जा रहे हैं, जिनका संबंध भाजपा से जुड़े नेताओं से माना जाता है और जिनके आगामी चुनावों में सक्रिय होने की चर्चा है। हालांकि इस संबंध में जांच पूरी होने से पहले किसी नतीजे पर पहुंचना उचित नहीं होगा।

पुलिस अब संबंधित संस्थानों के बैंक खातों, वित्तीय लेन-देन और छात्रवृत्ति वितरण से जुड़े रिकॉर्ड की तह तक जाने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि जांच के दायरे में आने वाले तथ्यों के आधार पर आगे और भी कार्रवाई हो सकती है।

एफआईआर में जिन 19 शिक्षण संस्थानों के नाम शामिल हैं, उनमें गॉड ब्लेस पब्लिक स्कूल, एम.जी. पब्लिक स्कूल, ए.एस.एन. इंटर कॉलेज, सैनी प्राइवेट आईटीआई, जय भारती प्राइवेट आईटीआई, एसबीएन प्राइवेट आईटीआई, आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च सेंटर, विश्व भारती पब्लिक स्कूल, मदरसा नूर-ए-हसन, जय भारत पब्लिक स्कूल, हन्नू आईटीआई, रेडियंस एकेडमी, रामतीर्थ उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, रुड़की इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, महर्षि दयानंद प्राइवेट आईटीआई, संस्कृति पब्लिक स्कूल, फोनिक्स स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड बिजनेस, एसडीपीसी गर्ल्स इंटर कॉलेज तथा ओम इंस्टीट्यूट ऑफ एजुकेशन शामिल हैं।

अब पूरे मामले पर लोगों की निगाहें एसआईटी की जांच पर टिकी हैं। यदि आरोप साबित होते हैं तो संबंधित संस्थानों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। वहीं जांच पूरी होने तक सभी आरोप जांच के अधीन हैं और अंतिम निष्कर्ष जांच रिपोर्ट आने के बाद ही सामने आएगा।


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