सोनिया शर्मा ने की “जन निर्माण पार्टी” के आग़ाज़ की घोषणा, मज़बूत व क़द्दावर कार्यकर्ताओं की मौजूदगी बनी चर्चा का मरकज़।
भ्रष्टाचार के ख़िलाफ़ हुंकार के साथ मैदान में उतरी जन निर्माण पार्टी।
उत्तराखंड की सियासत में नई दस्तक, जन निर्माण पार्टी ने पहले दिन दिखाई ताक़त।
विशेष रिपोर्ट-मौ. गुलबहार गौरी
रुड़की/देहरादून। 21जून 2026 उत्तराखंड की सियासत में उस वक़्त एक नई हलचल पैदा हो गई जब खानपुर से विधायक उमेश कुमार शर्मा की पत्नी सोनिया शर्मा ने दिल्ली रोड स्थित सैंट्रम होटल में आयोजित एक भव्य समारोह के दौरान अपनी नई सियासी जमाअत “जन निर्माण पार्टी” के आग़ाज़ का बाक़ायदा ऐलान कर दिया। पार्टी के एलान के लिए आयोजित इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख़्तलिफ़ ज़िलों, विधानसभा क्षेत्रों और दूर-दराज़ इलाक़ों से बड़ी तादाद में लोग, समर्थक और कार्यकर्ता शरीक हुए। कार्यक्रम में दिखाई दिया जोश, उत्साह और जनसमर्थन इस बात का गवाह बना कि नई पार्टी ने अपने पहले ही आयोजन से राजनीतिक गलियारों में चर्चा का विषय बनने में कामयाबी हासिल कर ली है।
इस मौक़े पर मुख्य अतिथि के तौर पर मौजूद विधायक उमेश कुमार शर्मा ने अपने ख़िताब में कहा कि जन निर्माण पार्टी का सबसे बड़ा मक़सद उत्तराखंड से भ्रष्टाचार को ख़त्म करना और ख़ास तौर पर हरिद्वार जनपद में फैले भ्रष्टाचार को जड़ से उखाड़ फेंकना है। उन्होंने कहा कि पार्टी अवाम के मसाइल को हल करने, समाज के कमज़ोर तबक़ों को मज़बूती देने और विकास को आख़िरी व्यक्ति तक पहुंचाने की सोच के साथ आगे बढ़ेगी। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने कहा, “जो लोग अगले पाँच महीनों तक मेरी पत्नी की पार्टी को मज़बूत करने में मदद करेंगे, मैं ज़िंदगी भर उनका साथ दूँगा।” उनके इस बयान का मौजूद लोगों ने ज़ोरदार तालियों और नारों के साथ इस्तक़बाल किया। कई मौक़ों पर पूरा पंडाल समर्थकों के नारों से गूंजता दिखाई दिया।
पार्टी अध्यक्ष सोनिया शर्मा ने अपने संबोधन में कहा कि जन निर्माण पार्टी किसी एक वर्ग, जाति या क्षेत्र की पार्टी नहीं होगी, बल्कि पूरे समाज की आवाज़ बनकर काम करेगी। उन्होंने कहा कि किसानों, नौजवानों, महिलाओं, मज़दूरों और आम जनता के मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा। उनका कहना था कि राजनीति का असली मक़सद सत्ता हासिल करना नहीं बल्कि जनता की ख़िदमत करना है और जन निर्माण पार्टी इसी उसूल पर आगे बढ़ेगी। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पार्टी जनता के विश्वास और उम्मीदों पर खरा उतरने के लिए पूरी निष्ठा और ईमानदारी के साथ काम करेगी।
इस आयोजन का एक दिलचस्प और आकर्षण का केंद्र बना दृश्य उस समय देखने को मिला जब राव सज्जाद डन्ढेरा अपने समर्थकों और कार्यकर्ताओं के साथ छह जेसीबी मशीनों पर सवार होकर आयोजन स्थल पहुंचे। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने इस अनोखे अंदाज़ का स्वागत किया और यह दृश्य पूरे आयोजन के दौरान चर्चा का विषय बना रहा। बड़ी संख्या में मौजूद लोगों ने इसे कार्यकर्ताओं के उत्साह और समर्थन का प्रतीक बताया।
कार्यक्रम की सबसे अहम बात यह रही कि इसमें केवल खानपुर विधानसभा क्षेत्र के लोग ही शामिल नहीं हुए, बल्कि उत्तराखंड के विभिन्न ज़िलों और कई अन्य विधानसभा क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में कार्यकर्ता पहुंचे। इससे यह संदेश गया कि पार्टी की पहुंच और प्रभाव केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं है। कई कार्यकर्ता सैकड़ों किलोमीटर का सफ़र तय करके कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे, जिससे आयोजन का महत्व और बढ़ गया।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विधायक उमेश कुमार शर्मा का प्रभाव केवल खानपुर विधानसभा तक सीमित नहीं रहा है। आमतौर पर देखा जाता है कि कोई भी जनप्रतिनिधि अपने निर्वाचन क्षेत्र की समस्याओं तक ही अपनी सक्रियता रखता है, लेकिन उमेश कुमार शर्मा को पिछले कई वर्षों से प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में लोगों की समस्याओं को सुनते और उनके समाधान के लिए प्रयास करते हुए देखा गया है।
ख़ास तौर पर उत्तराखंड के अलावा सीमावर्ती इलाक़ों और पड़ोसी जनपदों जैसे सहारनपुर, बिजनौर, मुज़फ़्फ़रनगर और मेरठ के लोगों के मसाइल में भी उनकी सक्रियता कई बार देखने को मिली है। यही वजह है कि उनकी जनसेवा का असर खानपुर विधानसभा की सीमाओं से निकलकर दूसरे ज़िलों और पड़ोसी क्षेत्रों तक भी महसूस किया जाता है।
अगर सामाजिक कार्यों की बात की जाए तो विधायक उमेश कुमार शर्मा द्वारा कराए गए 853 कन्याओं के विवाह आज भी लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं। इन विवाहों की कोई भौगोलिक सीमा नहीं थी। देश के अलग-अलग हिस्सों से आर्थिक रूप से कमज़ोर परिवारों ने अपनी बेटियों के विवाह के लिए सहायता मांगी और उनका पंजीकरण किया गया। इसके बाद विवाह की पूरी ज़िम्मेदारी निभाई गई। इस सामाजिक पहल ने हज़ारों परिवारों के दिलों में भरोसा पैदा किया और जनसेवा के क्षेत्र में उनकी एक अलग पहचान स्थापित की।
सियासी हलकों में यह माना जा रहा है कि वर्षों से किए गए ऐसे सामाजिक और जनहित के कार्यों का लाभ अब जन निर्माण पार्टी को भी मिल सकता है। शायद यही वजह रही कि पार्टी के पहले बड़े आयोजन में दूर-दराज़ क्षेत्रों से लोग स्वयं पहुंचकर पार्टी के साथ खड़े दिखाई दिए। कार्यक्रम में मौजूद लोगों की संख्या से ज़्यादा चर्चा उनकी प्रतिबद्धता, उत्साह और संगठनात्मक क्षमता की रही।
कार्यक्रम की एक और ख़ासियत यह रही कि यहां मौजूद लोग केवल भीड़ का हिस्सा नज़र नहीं आ रहे थे। उनके जोश, अनुशासन और सक्रिय भागीदारी ने यह एहसास कराया कि वे केवल समर्थक नहीं बल्कि पार्टी के मज़बूत व क़द्दावर कार्यकर्ता हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि किसी भी दल की असली ताक़त उसके मज़बूत व क़द्दावर कार्यकर्ता होते हैं और जन निर्माण पार्टी के पहले ही आयोजन में ऐसे कार्यकर्ताओं की बड़ी मौजूदगी भविष्य के लिए एक सकारात्मक संकेत मानी जा रही है।
फ़िलहाल जन निर्माण पार्टी के क़ियाम के साथ उत्तराखंड की सियासत में नए समीकरणों को लेकर चर्चाओं का दौर तेज़ हो गया है। आने वाले दिनों में पार्टी अपने संगठन का विस्तार किस तरह करती है, जनता के बीच अपनी पकड़ कितनी मज़बूत बनाती है और प्रदेश की राजनीति में किस तरह की भूमिका अदा करती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। इतना ज़रूर कहा जा सकता है कि सोनिया शर्मा के नेतृत्व में शुरू हुई यह नई सियासी पारी उत्तराखंड की राजनीति में एक नई बहस, नई उम्मीद और नए राजनीतिक विकल्प के तौर पर देखी जा रही है।