अमरकंटक में जुटेंगे देशभर के पत्रकार, IFWJ की 144वीं राष्ट्रीय कार्यसमिति बैठक 27–29 मार्च को
पत्रकार हितों पर मंथन: मीडिया काउंसिल, सुरक्षा कानून समेत अहम प्रस्ताव एजेंडे में ।
रिपोर्ट- मौ. गुलबहार गौरी
17 मार्च 2026 नई दिल्ली – मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के पवित्र स्थल अमरकंटक में, जहाँ माँ नर्मदा का उद्गम होता है, आगामी 27, 28 और 29 मार्च 2026 को इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) की 144वीं राष्ट्रीय वर्किंग कमेटी बैठक आयोजित की जाएगी। “कल्याण सेवा आश्रम” में होने वाली इस महत्वपूर्ण बैठक में देशभर से सैकड़ों पत्रकारों के शामिल होने की उम्मीद है। पत्रकार हितों से जुड़े अहम मुद्दों पर चर्चा और कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित किए जाने की तैयारी है।
इस राष्ट्रीय बैठक में IFWJ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अवधेश भार्गव, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौ. गुलबहार गौरी तथा राष्ट्रीय महासचिव इरशाद खान की विशेष उपस्थिति रहेगी। इनके अलावा विभिन्न राज्यों के पदाधिकारी, कार्यसमिति सदस्य और राष्ट्रीय पार्षद भी अनिवार्य रूप से बैठक में हिस्सा लेंगे। संगठन के स्तर पर यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है, क्योंकि इसमें पत्रकारों के अधिकार, सुरक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण से जुड़े मुद्दों पर ठोस निर्णय लिए जाने हैं।
उत्तराखंड से भी इस बैठक में 10 पत्रकारों के प्रतिनिधिमंडल के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। इनमें IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौ. गुलबहार गौरी के साथ सुनील थपलियाल, सुलोचना पयाल, मीना नेगी, भगवती प्रसाद रतूड़ी, उपेंद्र सिंह असवाल, देवेंद्र सिंह रावत, शेखर सिंह रावत, दीपक खंकरियाल और संदीप कुमार आर्य शामिल हैं। यह टीम राज्य के पत्रकारों की समस्याओं और सुझावों को राष्ट्रीय मंच पर मजबूती से रखने की तैयारी में है।
बैठक की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए मध्यप्रदेश IFWJ के प्रांताध्यक्ष उपेंद्र गौतम और प्रदेश महासचिव रामगोपाल बंसल 18 मार्च 2026 को शहडोल पहुँच रहे हैं। आयोजन स्थल की व्यवस्थाओं, आवास, भोजन और बैठक के एजेंडे को लेकर अंतिम रणनीति इसी दौरान तय की जाएगी। आयोजकों के अनुसार, इस बार की बैठक को भव्य और सुव्यवस्थित बनाने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
कार्यसमिति बैठक में कई महत्वपूर्ण प्रस्ताव रखे जाएंगे, जो पत्रकारों के हितों के लिए निर्णायक साबित हो सकते हैं। इनमें सबसे प्रमुख प्रस्ताव केन्द्र सरकार से मीडिया काउंसिल के गठन की मांग का है, ताकि पत्रकारिता से जुड़े मामलों की सुनवाई और नियमन के लिए एक सशक्त मंच तैयार हो सके। इसके अलावा, देशभर के श्रमजीवी पत्रकारों द्वारा प्रकाशित साप्ताहिक, मासिक और त्रैमासिक पत्र-पत्रिकाओं को आर्थिक मजबूती देने के लिए केन्द्र और राज्य सरकारों से प्रतिवर्ष कम से कम दो लाख रुपये के विज्ञापन देने का प्रस्ताव भी रखा जाएगा।
एक अन्य अहम प्रस्ताव पत्रकार सुरक्षा कानून को और कड़ा बनाने से जुड़ा है। इसके तहत पत्रकारों के खिलाफ होने वाले हमलों को गैर-जमानती अपराध घोषित करने और ऐसे मामलों में एक वर्ष तक न्यायालय द्वारा जमानत न देने का प्रावधान लागू करने की मांग की जाएगी। इस प्रस्ताव को पत्रकारों की सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि देश के कई हिस्सों में पत्रकारों पर हमलों की घटनाएं लगातार सामने आती रही हैं।
राज्य सरकारों ने पत्रकारों के लिए मान्यता/ अधिमान्यता के लिए शैक्षणिक योग्यता स्नातक रखीं जबकि कुछ राज्यों मे 2000 से पहले पत्रकारिता कर रहे पत्रकारों के लिए इसे हाईस्कूल रखा गया है इसमे IFWJ प्रस्ताव लायेगा कि 2010 से पहले पत्रकारों के लिए शैक्षणिक योग्यता हाईस्कूल मानी जाए
इस अधिवेशन में उत्तराखंड, नई दिल्ली, जम्मू-कश्मीर, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, नागालैंड, केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, पंजाब, पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक और असम सहित देश के विभिन्न राज्यों से पत्रकार प्रतिनिधि भाग लेंगे। इस विविध भागीदारी से यह बैठक राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकारिता के मुद्दों पर व्यापक सहमति और रणनीति बनाने का एक मजबूत मंच साबित होगी।
कुल मिलाकर, अमरकंटक में होने वाली IFWJ की 144वीं राष्ट्रीय कार्यसमिति बैठक न केवल संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह पत्रकारों के अधिकारों, सुरक्षा और आर्थिक मजबूती की दिशा में बड़े फैसलों की आधारशिला भी रख सकती है। देशभर के पत्रकारों की नजरें इस बैठक पर टिकी हैं, जहाँ से आने वाले निर्णय भविष्य की पत्रकारिता को नई दिशा दे सकते हैं।