हॉर्मुज़ में ईरान के ‘सेफ्टी टोल’ प्रस्ताव से मचा हलचल, पहले भी कई देश वसूलते रहे हैं भारी ट्रांजिट शुल्क
रिपोर्ट-मौ. गुलबहार गौरी
21 मार्च 2026 नई दिल्ली- दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग Strait of Hormuz में ईरान द्वारा तेल टैंकरों पर “सेफ्टी टोल” लगाने की संभावित योजना ने वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा बाजार में नई बहस छेड़ दी है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य से होकर दुनिया के करीब 20 प्रतिशत तेल का परिवहन होता है, ऐसे में यहां किसी भी तरह का अतिरिक्त शुल्क सीधे तौर पर कच्चे तेल की कीमतों और वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रभावित कर सकता है।
हालांकि यह पहली बार नहीं है जब किसी देश या क्षेत्र द्वारा समुद्री मार्ग से गुजरने वाले जहाजों से शुल्क वसूला जा रहा हो। इससे पहले भी कई अहम समुद्री रास्तों पर “टोल” या “सेफ्टी चार्ज” के नाम पर भारी रकम ली जाती रही है।
सबसे प्रमुख उदाहरण मिस्र की Suez Canal का है, जो यूरोप और एशिया के बीच सबसे छोटा समुद्री मार्ग उपलब्ध कराती है। इस नहर से गुजरने वाले बड़े तेल टैंकरों (VLCC) को औसतन 3 लाख से 7 लाख डॉलर यानी लगभग 2.5 करोड़ से 6 करोड़ रुपये तक शुल्क देना पड़ता है। जहाज के आकार, वजन और तेल की मात्रा के आधार पर यह फीस और भी बढ़ सकती है। कई बार अतिरिक्त “सर्चार्ज” भी लगाया जाता है।
इसी तरह मध्य अमेरिका की Panama Canal भी एक बड़ा टोल मार्ग है। यहां से गुजरने वाले तेल टैंकरों को आमतौर पर 1.5 लाख से 4 लाख डॉलर यानी करीब 1.2 करोड़ से 3.3 करोड़ रुपये तक भुगतान करना पड़ता है। यह शुल्क जहाज के आकार, कंटेनर क्षमता और यात्रा की श्रेणी के अनुसार तय होता है।
यूरोप और एशिया को जोड़ने वाले तुर्की के जलडमरूमध्य, यानी Turkish Straits से गुजरने वाले जहाजों पर भी अप्रत्यक्ष रूप से शुल्क लिया जाता है। यहां सीधे भारी टोल नहीं होता, लेकिन पायलट सेवा, लाइटहाउस और नेविगेशन शुल्क के रूप में एक जहाज को 10 हजार से 50 हजार डॉलर यानी लगभग 8 लाख से 40 लाख रुपये तक खर्च करना पड़ता है।
दूसरी ओर, खाड़ी क्षेत्र में पहले से ही “सेफ्टी कॉस्ट” एक बड़ा मुद्दा रहा है। खासकर Strait of Hormuz में तनाव के दौरान जहाजों को “वार रिस्क इंश्योरेंस” और सुरक्षा खर्च के रूप में 2 लाख से 5 लाख डॉलर यानी करीब 1.5 करोड़ से 4 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त भुगतान करना पड़ता है। कई मामलों में नौसैनिक सुरक्षा (एस्कॉर्ट) के लिए अलग से शुल्क भी देना होता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर ईरान औपचारिक रूप से “सेफ्टी टोल” लागू करता है, तो यह लागत और बढ़ सकती है। इससे न केवल तेल कंपनियों पर आर्थिक दबाव बढ़ेगा, बल्कि इसका असर आम उपभोक्ताओं तक पहुंचेगा, क्योंकि परिवहन लागत बढ़ने से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में उछाल आ सकता है।
कुल मिलाकर, वैश्विक समुद्री व्यापार में “टोल” और “सेफ्टी चार्ज” कोई नई व्यवस्था नहीं है, लेकिन हॉर्मुज़ जैसे संवेदनशील और रणनीतिक मार्ग पर इसका लागू होना अंतरराष्ट्रीय राजनीति और अर्थव्यवस्था दोनों के लिए बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।