अमरकंटक से उठा “पत्रकार एकता का शंखनाद”, IFWJ का 144वां राष्ट्रीय अधिवेशन बना ऐतिहासिक मील का पत्थर।
नर्मदा उद्गम से उठी आवाज़—पत्रकारों के हक़ और सुरक्षा पर बड़ा मंथन
राष्ट्रीय स्तर पर पत्रकार सुरक्षा कानून और मीडिया काउंसिल की मांग तेज
अमरकंटक से शुरू हुई तहरीक, पत्रकारिता को मिलेगी नई दिशा और ताक़त
रिपोर्ट-मौ. गुलबहार गौरी
देहरादून (उत्तराखंड) 30 मार्च 2026 अमरकंटक (मध्यप्रदेश)। नर्मदा के पाक, रूहानी और मुक़द्दस उद्गम स्थल अमरकंटक की सरज़मीं पर इन दिनों एक ऐसा तारीखी मंजर सामने आया, जिसने न सिर्फ़ मुल्क भर की सहाफ़त (पत्रकारिता) को एक नई पहचान दी, बल्कि पत्रकार बिरादरी के हक़, हिफाज़त और इज़्ज़त की जद्दोजहद को भी नई रफ़्तार अता कर दी। इंडियन फेडरेशन ऑफ वर्किंग जर्नलिस्ट्स (IFWJ) का 144वां राष्ट्रीय कार्यसमिति अधिवेशन “कल्याण सेवा आश्रम” के सभागार में बड़े अदब, एहतराम और जोशो-ख़रोश के साथ मुनअक़िद हुआ, जिसमें देश के कोने-कोने से आए सैकड़ों सहाफ़ियों ने शिरकत कर इसे यादगार और ऐतिहासिक बना दिया।
इस तीन रोज़ा अधिवेशन का आग़ाज़ नर्मदा के उद्गम स्थल पर पारंपरिक विधि-विधान, दीप प्रज्वलन और शंखध्वनि के साथ हुआ। जैसे ही शंखनाद की गूंज फिज़ाओं में फैली, वैसे ही “पत्रकार एकता जिंदाबाद”, “भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ जिंदाबाद” और “राष्ट्रीय अध्यक्ष जिंदाबाद” जैसे जोशीले नारों ने पूरे अमरकंटक को गुंजायमान कर दिया। यह मंजर इस बात की खुली तस्दीक़ कर रहा था कि अब देशभर के पत्रकार अपने वजूद, अपने हक़ और अपनी पहचान के लिए एकजुट होकर आगे बढ़ने का अज़्म कर चुके हैं।
अधिवेशन की झलकियां
इस गरिमामयी और रूहानी माहौल में आयोजित इस अधिवेशन में मुख्य अतिथि के तौर पर अनूपपुर के विधायक फूंदेलाल सिंह की गरिमामयी मौजूदगी रही, जबकि कल्याण सेवा आश्रम के प्रमुख, हिमाद्री मुनि जी और संत समाज के अन्य गणमान्य हस्तियों ने कार्यक्रम को और भी मुकम्मल बनाया। मेहमानों का इस्तक़बाल हिंदुस्तानी तहज़ीब के मुताबिक शाल, श्रीफल, पटका और यादगार निशानात पेश कर किया गया, जिसने पूरे आयोजन को मोहब्बत, अपनत्व और अदब से सराबोर कर दिया।
अमरकंटक अधिवेशन की शानदार झलक
इस अवसर पर IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौहम्मद गुलबहार गौरी को IFWJ व भारतीय श्रमजीवी पत्रकार संघ शहडोल की तरफ़ से सम्मान पत्र, स्मृति चिह्न, पटका व शॉल उढ़ाकर सम्मानित किया गया।
IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौ. गुलबहार गौरी को इन स्मृति चिन्हों से सम्मानित किया गया
इस मौके पर हिमाद्री मुनि जी ने अपने खिताब में अमरकंटक की रूहानी और धार्मिक अहमियत पर रोशनी डालते हुए कहा कि “नर्मदा पुराण में ज़िक्र है कि इस धरती पर 88 हज़ार ऋषि-मुनियों ने वर्षों तक तपस्या और यज्ञ किए। यह सिर्फ़ एक तीर्थ नहीं, बल्कि साधना, तप और इबादत की ज़िंदा मिसाल है।” उन्होंने देशभर से आए पत्रकार साथियों का दिली इस्तक़बाल किया और उनके मुस्तकबिल के लिए दुआएँ पेश कीं।
वहीं विधायक फूंदेलाल सिंह ने सहाफ़ियों का ख़ैरमकदम करते हुए उन्हें यक़ीन दिलाया कि पत्रकारों की हिफाज़त, रोज़गार, स्वास्थ्य और सम्मान से जुड़े तमाम मसलों को मध्यप्रदेश सरकार के सामने पूरी ताक़त के साथ उठाया जाएगा। उन्होंने मीडिया काउंसिल के क़ियाम और पत्रकार सुरक्षा कानून को लागू कराने के लिए हर मुमकिन मदद देने का भरोसा भी दिलाया।
इस अधिवेशन की असली रूह उन अहम प्रस्तावों में नज़र आई, जो पत्रकार बिरादरी के हक़ और मुस्तकबिल को मज़बूत बनाने के लिए पेश किए गए। IFWJ के राष्ट्रीय अध्यक्ष अवधेश भार्गव ने सदन के सामने कई अहम मसले रखे, जिनमें मीडिया काउंसिल का गठन, पत्रकार सुरक्षा कानून को और सख्त बनाना, पत्रकारों के लिए कल्याणकारी योजनाओं का विस्तार, स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराना और पेंशन व्यवस्था को सरल बनाना शामिल था। इसके साथ ही अधिमान्य पत्रकारों के लिए शैक्षणिक योग्यता से जुड़ा एक अहम प्रस्ताव भी रखा गया, जिसमें 2010 से पहले पत्रकारिता कर रहे साथियों के लिए न्यूनतम योग्यता हाईस्कूल माने जाने की बात कही गई।
राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौ. गुलबहार गौरी ने अपने खिताब में पत्रकारों की हिफाज़त के मुद्दे को बेहद अहम करार देते हुए कहा कि “जिस तरह समाज के दूसरे तबकों की सुरक्षा के लिए सख्त कानून बनाए गए हैं, उसी तरह पत्रकारों पर हमले को भी एससी/एसटी एक्ट की तरह गैर-जमानती धाराओं में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि सच की आवाज़ को दबाने वालों को कड़ा सबक मिल सके।”
इन तमाम प्रस्तावों को सदन ने ज़ोरदार करतल ध्वनि के साथ मंज़ूरी दी, जो इस बात का खुला ऐलान है कि अब पत्रकार समाज अपने हक़ की लड़ाई के लिए पूरी तरह संगठित और तैयार है। साथ ही यह फ़ैसला भी लिया गया कि इन प्रस्तावों को देश के तमाम सांसदों और विधायकों के ज़रिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक पहुंचाया जाएगा, ताकि इन्हें क़ौमी सतह पर अमल में लाया जा सके और पत्रकारों के हक़ को मज़बूती मिले।
मंच की सदारत राष्ट्रीय अध्यक्ष अवधेश भार्गव और मध्यप्रदेश के अध्यक्ष उपेंद्र गौतम ने की। इस दौरान IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौ. गुलबहार गौरी, राष्ट्रीय महासचिव इरशाद खान, एस.एन. श्याम (बिहार), अनमोल कुमार (बिहार), नीतेश भालवंकर (महाराष्ट्र), भारत वेद केकर (गोवा), दीपक तलवारे (महाराष्ट्र), सुलोचना पयाल (उत्तराखंड), स्वामी जगदीशानंद जी, विनोद कारके जी, राहुल सिंह राणा, अरविंद द्विवेदी समेत कई राज्यों से आए नुमाइंदों ने अपने-अपने ख्यालात पेश किए।
अन्य प्रदेशों से शामिल हुए मुख्यतः भोला प्रसाद, अवधेश कुमार शर्मा (बिहार), श्री भगवान भारद्वाज (दिल्ली), विनोद मेथार (गोवा), संदीप कमुलकर (गोवा), मनोज कुमार, भारत बेतकेकर (गोवा), सुनील वर्मा अकोढिया, मध्य प्रदेश), गिरजा शंकर राय (झाँसी, उत्तर प्रदेश) सहित सैकड़ों पत्रकारों ने शिरकत की।
मध्यप्रदेश के संगठन प्रभारी एवं संयोजक राहुल सिंह राणा ने अपने स्वागत भाषण में सभी मेहमानों का इस्तक़बाल किया और आयोजन की रूपरेखा पर रोशनी डाली। वहीं शहडोल से आए सगीर खान, जुनैद खान, शैलेंद्र तिवारी, हारून रशीद खान, अरविंद द्विवेदी व लुकमान अली ने भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हुए इस आयोजन को कामयाब बनाने में अहम किरदार अदा किया।
अपने जोशीले खिताब में राष्ट्रीय अध्यक्ष अवधेश भार्गव ने पत्रकारों को देवर्षि नारद और वीर हनुमान की मिसाल देते हुए कहा कि “पत्रकार समाज का रहनुमा होता है और उसकी कलम सच का आईना होती है। ऐसे में उसकी हिफाज़त और इज़्ज़त का कायम रहना बेहद ज़रूरी है।” उन्होंने साफ़ लहजे में कहा कि पत्रकार सुरक्षा कानून को लागू कराने के लिए अब हर स्तर पर जद्दोजहद करनी होगी।
वहीं उपेंद्र गौतम ने संगठन की मजबूती और आने वाले वक़्त की रणनीतियों पर रौशनी डालते हुए कहा कि “आज की सबसे बड़ी ज़रूरत इत्तेहाद (एकजुटता) है। अगर हम संगठित हैं, तो कोई ताक़त हमारे हक़ को कुचल नहीं सकती।”
इस अधिवेशन का एक बेहद जज़्बाती और दिल को छू लेने वाला लम्हा उस वक़्त सामने आया, जब अलग-अलग राज्यों से आए पत्रकारों ने एक-दूसरे को पवित्र नदियों का जल भेंट कर भाईचारे, एकता और राष्ट्रीय अखंडता का अनोखा पैग़ाम दिया। उत्तराखंड से आए IFWJ के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष मौ. गुलबहार गौरी, राष्ट्रीय अनुशासन समिति के अध्यक्ष सुनील थपलियाल, राष्ट्रीय कार्यकारिणी की सदस्य सुलोचना पयाल, उपेंद्र असवाल, भगवती रतूड़ी और आशा रोथान ने गंगोत्री का पवित्र जल भेंट किया, जबकि बैतूल से आए वरिष्ठ पत्रकार और नेशनल काउंसिल सदस्य डॉ. रामकिशोर दयाराम पवार ने ताप्ती नदी का जल और ताप्ती कैलेंडर पेश किया। इस दौरान नर्मदा, गंगा और ताप्ती के जल का आदान-प्रदान एक ऐसी मिसाल बन गया, जिसने “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” की तस्वीर को ज़मीनी हक़ीक़त में तब्दील कर दिया।
सभी सहाफ़ियों को दूसरे दिन संगठन के विस्तार, सदस्यता अभियान और विभिन्न राज्यों में संगठन को और मज़बूत करने के मसलों पर तफ़सीली गुफ़्तगू की गई। इसमें प्रतिनिधियों ने अपने-अपने सुझाव पेश किए और संगठन की कार्ययोजना को और असरदार बनाने पर जोर दिया।
उत्तराखंड, महाराष्ट्र, राजस्थान, गुजरात, केरल, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश समेत देश के कई राज्यों से आए सहाफ़ियों की बड़ी तादाद ने यह साबित कर दिया कि यह अधिवेशन महज़ एक मीटिंग नहीं, बल्कि एक मज़बूत तहरीक (आंदोलन) की बुनियाद है।
अमरकंटक की इस मुक़द्दस धरती से उठा “पत्रकार एकता का शंखनाद” अब पूरे मुल्क में गूंजने के लिए तैयार है। यह आयोजन न सिर्फ़ पत्रकारों के हक़, हिफाज़त और इज़्ज़त की नई इबारत लिखेगा, बल्कि आने वाले दौर में सहाफ़त को एक नई सोच, नई ताक़त और नई पहचान भी देगा।