अंकिता हत्याकांड पर सड़कों पर उतरा हरिद्वार, सीबीआई जांच और वीआईपी गिरफ़्तारी की मांग तेज़ कुंभ नगरी में इंसाफ़ की शमा रोशन, अंकिता को न्याय दिलाने के लिए उमड़ा जनसैलाब
हरिद्वार | विशेष रिपोर्ट-मौ. गुलबहार गौरी
2 जनवरी 2026
सितम्बर 2022 में घटित अंकिता भंडारी हत्याकांड एक बार फिर उत्तराखंड की सियासत और समाज के ज़मीर को झकझोर रहा है। जैसे-जैसे इस संगीन मामले में वीआईपी नामों के सामने आने की बातें उजागर हो रही हैं, वैसे-वैसे मैदान से लेकर पहाड़ तक आम अवाम के दिलों में ग़ुस्सा और बेचैनी बढ़ती जा रही है। भाजपा सरकार पर सीबीआई जांच से बचने और दोषी नेताओं को संरक्षण देने के आरोप अब केवल राजनीतिक बयानबाज़ी तक सीमित नहीं रहे, बल्कि यह मामला एक बड़े जन आंदोलन की शक्ल अख़्तियार कर चुका है।
इसी सिलसिले में साल के पहले दिन कुंभ नगरी हरिद्वार में कांग्रेस ने एक ज़ोरदार कैंडल मार्च निकाल कर सरकार के खिलाफ़ अपना ऐतराज़ दर्ज कराया। वरिष्ठ कांग्रेस नेता सोम त्यागी और कांग्रेस ब्लॉक अध्यक्ष विकास चंद्रा के संयोजन में यह कैंडल मार्च बाल्मीकि चौक से शुरू होकर हर की पैड़ी तक निकाला गया। हाथों में मोमबत्तियां लिए हज़ारों की तादाद में उमड़े लोगों ने धामी सरकार और भाजपा के खिलाफ़ जमकर नारेबाज़ी की। हरिद्वार की सड़कों पर पसरा यह हुजूम इस बात की गवाही दे रहा था कि अंकिता को इंसाफ़ दिलाने की मांग अब आम जनता की आवाज़ बन चुकी है। इस मार्च का नेतृत्व प्रदेश के पूर्व मंत्री डॉ. हरक सिंह रावत ने किया।
कैंडल मार्च को संबोधित करते हुए डॉ. हरक सिंह रावत ने दो टूक कहा कि अंकिता भंडारी हत्याकांड की सीबीआई जांच जज की निगरानी में होनी चाहिए, ताकि वीआईपी प्रकरण से पर्दा उठ सके। उन्होंने कहा कि जिस तरह निर्भया कांड के बाद पूरा देश सड़कों पर उतर आया था, उसी तरह अंकिता हत्याकांड को लेकर भी जनता में भारी आक्रोश है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा नेता खुद अपने बयानों और ऑडियो के ज़रिये इस मामले में शामिल वीआईपी नामों को उजागर कर रहे हैं। उर्मिला सनावर और सुरेश राठौर के कथित ऑडियो का हवाला देते हुए उन्होंने मांग की कि सीबीआई जांच के साथ-साथ नारको टेस्ट भी कराया जाना चाहिए। डॉ. रावत ने कहा कि कांग्रेस उत्तराखंड की बेटी को इंसाफ़ दिलाने के लिए सड़क से लेकर सदन तक संघर्ष करती रहेगी।
( इस विडियो में बिहार से 25 हज़ार में शादी के लिए लड़की ख़रीदते रेखा आर्य के पति )
इस पूरे मामले के बीच भाजपा की महिला सम्मान की कथनी पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। उत्तराखंड कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य के पति गिरधारी लाल साहू द्वारा भाजपा की एक बैठक में दिया गया विवादित बयान—“बिहार में 20-25 हजार में लड़की मिल जाती है”—राजनीतिक हलकों में भूचाल ले आया है। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मनोज सैनी ने इस बयान की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि यह बयान न केवल महिलाओं के प्रति भाजपा नेताओं की घटिया सोच को उजागर करता है, बल्कि बिहार की महिलाओं का भी खुला अपमान है। उन्होंने मंत्री रेखा आर्य से नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा देने की मांग की और कहा कि जिनके परिवार में ऐसी महिला विरोधी मानसिकता हो, उन्हें मंत्री पद पर बने रहने का कोई हक नहीं है।
मनोज सैनी ने आगे कहा कि अंकिता हत्याकांड में शामिल भाजपा के वीआईपी नेताओं को बचाने की कोशिश और इस तरह के बयान भाजपा की असली सोच को जनता के सामने लाते हैं। “बेटी बचाओ–बेटी पढ़ाओ” का नारा देने वाली भाजपा का चेहरा अब बेनक़ाब हो चुका है और जनता सब कुछ समझ चुकी है।
अनुसूचित प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष मदन लाल और हरिद्वार ग्रामीण के जिलाध्यक्ष बालेश्वर सिंह ने भी साफ़ कहा कि जब तक अंकिता भंडारी को पूरा इंसाफ़ नहीं मिल जाता, तब तक कांग्रेस का आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने कहा कि यह लड़ाई केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि प्रदेश और देश की हर बेटी के सम्मान की लड़ाई है।
वरिष्ठ कांग्रेस नेता मनोज सैनी और अशोक शर्मा ने कहा कि कैंडल मार्च में उमड़ा भारी जनसमूह इस बात का सबूत है कि समाज अब अपराधों पर चुप बैठने वाला नहीं है। जनता अब न्याय के लिए सड़कों पर उतर कर भाजपा की कथनी और करनी के फर्क को उजागर करती रहेगी।
कैंडल मार्च में पूर्व राज्यमंत्री किरण पाल वाल्मीकि, पूर्व महापौर श्रीमती अनीता शर्मा, युवाग्नि के अध्यक्ष ऋषभ वशिष्ठ, यूथ कांग्रेस जिलाध्यक्ष कैश खुराना, पूर्व अध्यक्ष नितिन तेश्वर, महिला महानगर अध्यक्ष लता जोशी सहित सैकड़ों कांग्रेस कार्यकर्ता और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल रहे। मोमबत्तियों की लौ के साथ उठती यह आवाज़ साफ़ संदेश दे रही थी कि अंकिता भंडारी को इंसाफ़ दिलाने की जंग अभी थमी नहीं है।