अंजुमन ग़ुलामाने मुस्तफ़ा ﷺ ने मनाया जश्न-ए-विलादत, भाईचारे की पेश की मिसाल


अंजुमन ग़ुलामाने मुस्तफ़ा ﷺ ने मनाया जश्न-ए-विलादत,भाईचारे की पेश की मिसाल

अंजुमन ग़ुलामाने मुस्तफ़ा ﷺ की जानिब से जश्न-ए-विलादत,इंसाफ़ की तालीमात को किया गया आम

रिपोर्ट- मौ. गुलबहार गौरी
रुड़की-3 जनवरी 26 – जश्न-ए-विलादत-ए मौला अली अ.स. पर आम लंगर का शानदार आयोजन, रूड़की में अक़ीदत और भाईचारे की मिसाल,इस्लामिक कैलेंडर के मुक़द्दस महीने रजब की 13 तारीख़, बामुताबिक 3 जनवरी 2026, को पैग़म्बर-ए-इस्लाम हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा ﷺ के अज़ीज़ भाई, दामाद और ख़लीफ़ा-ए-बरहक़ हज़रत अली अ.स. की विलादत-ए-बासआदत के मौके पर रूड़की शहर में अक़ीदत, एहतराम और रूहानियत से सराबोर माहौल देखने को मिला। इस मुबारक दिन पर शहर के लोगों में खासा जोश, उत्साह और मुहब्बत नज़र आई।

हज़रत अली अ.स. इस्लाम की वह अज़ीम शख़्सियत हैं जिन्हें “इल्म का दरवाज़ा”, इंसाफ़ की जीती-जागती मिसाल और इंसानियत का सच्चा रहनुमा माना जाता है। उनकी पूरी ज़िन्दगी बहादुरी, सादगी, सब्र, हक़परस्ती और इंसाफ़ के उसूलों पर क़ायम रही, जो आज भी पूरी इंसानियत के लिए मशाल-ए-राह है। उनकी तालीमात हर दौर में समाज को अमन, बराबरी और इंसाफ़ का रास्ता दिखाती हैं।

हर साल की तरह इस साल भी अंजुमन ग़ुलामाने मुस्तफ़ा ﷺ सोसाइटी (रजि.), रूड़की चैप्टर की जानिब से जश्न-ए-विलादत-ए मौला अली अ.स. को बड़ी अक़ीदत, मुहब्बत और ख़ुलूस के साथ मनाया गया। इसी सिलसिले में 3 जनवरी 2026 को आम लंगर का आयोजन किया गया, जिसमें शहर के हर तबक़े के लोगों ने बढ़-चढ़ कर शिरकत की।

यह आम लंगर रामपुर रोड स्थित उमर एन्क्लेव कॉलोनी के बाहर लगाया गया, जहाँ राजमा-चावल और गाजर के हलवे का तबर्रुक बड़ी तादाद में मौजूद लोगों में तक़सीम किया गया। लंगर के दौरान किसी भी तरह का भेदभाव नहीं देखा गया और हर मज़हब, हर जाति और हर वर्ग के लोग एक साथ बैठकर तबर्रुक हासिल करते नज़र आए। इस आयोजन के ज़रिये यह पैग़ाम दिया गया कि हज़रत अली अ.स. किसी एक कौम या मज़हब तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वह हर उस इंसान के रहनुमा हैं जो इंसाफ़, हक़, बराबरी और इंसानियत में यक़ीन रखता है।

इस मौके पर हज़रत अली अ.स. के मशहूर अक़वाल को भी याद किया गया—
“ग़रीब का दोस्त और ज़ालिम का दुश्मन बनो।”
और
“जिस पर ज़ुल्म हो रहा हो, उसकी मदद करो और ज़ुल्म करने वाले को जायज़ ताक़त (कुव्वते-बाज़ू) से रोको।”
इन अक़वाल के ज़रिये समाज में इंसाफ़, अमन और भाईचारे का पैग़ाम आम किया गया।

अंजुमन ग़ुलामाने मुस्तफ़ा ﷺ सोसाइटी के सेक्रेटरी कुंवर शाहिद ने कहा कि मौला अली अ.स. की तालीमात आज के दौर में भी उतनी ही अहम हैं, जितनी पहले थीं। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का मक़सद मौला अली अ.स. की तालीमात—इंसाफ़, इंसानियत, भाईचारा, सब्र और ख़िदमत-ए-ख़ल्क़—को समाज के हर तबक़े तक पहुँचाना है। उन्होंने कहा कि लंगर जैसी परंपराएं समाज में आपसी मोहब्बत और भाईचारे को मज़बूत करती हैं।

आयोजकों के मुताबिक लंगर का आग़ाज़ दोपहर 12 बजे किया गया और कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण, मर्यादित और कामयाब तरीके से सम्पन्न हुआ। अंजुमन की जानिब से तमाम शिरकत करने वालों और सहयोगियों का तहे-दिल से शुक्रिया अदा किया गया। इस लंगर को कामयाब बनाने में राशिद अहमद (केबल वाले), अमजद अली ठेकेदार, सुहैल खान कैटरर्स, हैदर उर्फ़ आसिफ अली, साहिल मलिक, साकिब शहज़ाद, आदिल गौर, परवेज़ आलम, गौरव बंसल, रामपाल सिंह, बिलाल खान, मेहरबान अली, अनस गाज़ी समेत कई गणमान्य लोगों ने अहम भूमिका निभाई। कार्यक्रम के अंत में मुल्क और समाज में अमन, चैन और भाईचारे के लिए दुआ की गई।


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